न देखा वो कहीं जल्वा जो देखा ख़ाना-ए-दिल में बहुत मस्जिद में सर मारा बहुत सा ढूँडा बुत-ख़ाना

“Nowhere did I behold that splendor which in the heart's chamber shone, / Though long I struck my brow in mosques, and searched each idol-shrine alone.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

जो जलवा मैंने अपने दिल के भीतर देखा, वह कहीं और नज़र नहीं आया, भले ही मैंने मस्जिद में बहुत सर पटका और बुतख़ाने में भी बहुत ढूँढा।

विस्तार

इस शेर में शायर सूफ़ियाना अंदाज़ में समझाते हैं कि जिस रूहानी नूर या ख़ुदा को हम बाहर ढूँढते हैं, वह असल में हमारे भीतर ही मौजूद है। उन्होंने मस्जिद में माथा टेक कर देख लिया और बुतख़ाने के भी तमाम चक्कर काट लिए, पर वो सुकून और जलवा बाहर कहीं नहीं मिला। आख़िरकार उन्हें यह अहसास हुआ कि जो सच्चा दीदार और इलाही मोहब्बत इंसान के अपने दिल में महसूस होती है, वह किसी भी इबादतगाह की चहारदीवारी में क़ैद नहीं है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.