किताबों में धरा है क्या बहुत लिख लिख के धो डालीं हमारे दिल पे नक़्श-ए-कल-हज्र है तेरा फ़रमाना

“What worth is held in books? So many have I written and washed away; yet etched like an inscription in stone upon my heart is your every word.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

किताबों में कुछ नहीं रखा है, बहुत कुछ लिख-लिखकर मिटा दिया गया है, लेकिन आपकी कही हुई बात हमारे दिल पर पत्थर की लकीर की तरह हमेशा के लिए छपी हुई है।

विस्तार

शायर यहाँ किताबी इल्म की तुलना में महबूब की बातों के गहरे असर को बयां कर रहे हैं। जैसे पुरानी तख़्तियों पर लिखा सबक धोकर मिटाया जा सकता है, वैसे ही किताबी ज्ञान भी वक़्त के साथ बेअसर हो जाता है। लेकिन महबूब का कहा हुआ हर लफ़्ज़ दिल पर पत्थर की लकीर (नक़्श-ए-कल-हज्र) की तरह अमर होकर हमेशा के लिए ठहर गया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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