“If anyone seeks to test their poetic gift, O Zafar, tell them to follow the measure of this ghazal.”
ऐ ज़फ़र, अगर कोई अपनी शायरी की प्रतिभा या तबीयत की परीक्षा लेना चाहता है, तो उससे कह दो कि वह इस ग़ज़ल के तौर-तरीक़े और अंदाज़ पर चलकर दिखाए।
इस मक़्ते में ज़फ़र बड़े ही नाज़ और फ़ख़्र के साथ अपनी शायरी का लोहा मनवाते हैं। वे कहते हैं कि अगर किसी को अपनी शायरी के हुनर और ज़ेहन की आज़माइश करनी हो, तो वह इस ग़ज़ल की बहर और अंदाज़ में लिखकर दिखाए। यह कोई घमंड नहीं, बल्कि अपनी रचना की रवानगी और गहराई पर शायर का वो गहरा भरोसा है जो हुनरमंद उस्तादों की पहचान होता है।
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