हिज्र के हाथ से अब ख़ाक पड़े जीने में दर्द इक और उठा आह नया सीने में

“At separation's cruel hand, let dust fall on this living breath; / Alas, another pain stirs new within my weary chest.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

जुदाई के कारण अब जीने का कोई मोल नहीं रहा यानी ज़िंदगी बेकार हो चुकी है, और अफ़सोस कि सीने में एक और नया दर्द उठ खड़ा हुआ है।

विस्तार

इस शेर में शायर जुदाई के उस असहनीय दर्द को बयां कर रहे हैं, जहां ज़िंदगी से सारा मोह ही ख़त्म हो जाता है। 'ख़ाक पड़े जीने में' कहकर वे अपनी बेबसी और बेज़ारी जताते हैं, मानो अब सांस लेना भी एक सज़ा बन चुका हो। दिल पहले ही ग़मों के बोझ तले दबा था, और उस पर एक और नया दर्द उभर आता है—यह दिखाता है कि हिज्र में तड़प कभी थमने का नाम नहीं लेती।

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