न वबाल तन पे है सर मिरा नहीं जान जाने का डर ज़रा कटे ग़म ही, निकले जो दम मिरा मुझे अपनी ज़िंदगी बार है

“No burden is this head upon my frame, nor do I fear that my life depart; my grief would end if my breath should cease—for this living weighs heavy upon my heart.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

मेरे जिस्म पर मेरा सिर कोई बोझ नहीं है और न ही मुझे अपनी जान जाने का ज़रा सा भी डर है। अगर मेरा दम निकल जाए तो मेरा ग़म ही ख़त्म होगा, क्योंकि मुझे अपनी ज़िंदगी बोझ मालूम होती है।

विस्तार

इस शेर में शायर ज़िंदगी की उस गहरी थकान का ज़िक्र कर रहे हैं जहाँ साँसें ही इंसान के लिए भारी बोझ बन जाती हैं। वे कहते हैं कि उन्हें जान जाने या सर कटने का कोई डर नहीं है, क्योंकि यह ज़िंदगी अब उनसे सही नहीं जाती। यहाँ मौत कोई ख़ौफ़नाक अंजाम नहीं, बल्कि ग़मों और तकलीफ़ों के लंबे सिलसिले से मिलने वाली एक सुकून भरी रिहाई नज़र आती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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