सभी जादा मातम-ए-सख़्त है कहो कैसी गर्दिश-ए-बख़्त है न वो ताज है न वो तख़्त है न वह शाह है न दयार है

“Every path is shrouded in bitter grief, what a cruel turn of fate is this; gone is the crown, gone the throne, gone the king, and gone the realm.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

हर रास्ता गहरे मातम में डूबा हुआ है, कहो यह किस्मत का कैसा बुरा फेर है। अब न वह ताज रहा, न वह तख्त, न वह बादशाह बचा और न ही वह देश या शहर।

विस्तार

यह शेर वक़्त की बेरहम गर्दिश और उसके नतीजे में फैली गहरी वीरानी का बेहद मार्मिक मंज़र पेश करता है। यहाँ सिर्फ़ किसी बादशाह के ताज और तख़्त छिनने का मातम नहीं, बल्कि उस पूरे वतन और तहज़ीब के हमेशा के लिए उजड़ जाने की आह है। यह हमें सांसारिक शान-ओ-शौकत की नश्वरता का दर्द भरा एहसास कराता है, जहाँ सब कुछ एक झटके में उजड़कर केवल एक खामोश याद बन जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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