“Were you sincere, I too would speak to you with open candor; but rancor fills your heart—to whom, then, should I speak?”
अगर तुम्हारा दिल साफ़ होता तो मैं भी तुमसे साफ़-साफ़ बात करता, लेकिन जब तुम्हारे दिल में ही मैल और रंजिश है, तो फिर मैं अपनी बात किससे कहूँ?
इस शेर में शायर उस बेबसी को बयां कर रहा है, जब दिल तो पूरी तरह सच कह देने को चाहे, मगर सामने वाले के मन में मैल हो। 'कुदूरत' यानी दिल में छुपी कड़वाहट या रंजिश, जो दो इंसानों के बीच के रिश्ते और साफ़गोई को धुंधला कर देती है। आशिक़ अपने दिल का सारा गुबार निकालना चाहता है, मगर जब महबूब का ही दिल साफ़ नहीं, तो फिर वह अपने जज़्बात बांटे भी तो किससे?
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