ग़ज़ल

ચોટ ગોઝારી

چوٹ گوزیری
अमृत घायल· Ghazal· 9 shers

यह ग़ज़ल 'चोट गोज़ारी' एक भावनात्मक रचना है जो बिछड़ने के दर्द और यादों के सहारे जीवन जीने की कहानी बयान करती है। इसमें प्रेम की गहरी भावनाओं और विरह की पीड़ा को काव्यात्मक ढंग से उकेरा गया है। यह ग़ज़ल सुनने वाले को एक उदास, रोमांटिक और चिंतनशील अनुभव देती है।

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
અમે ધારી નહોતી એવી અણધારી કરી લીધી. અજાણી આંખડીએ ચોટ ગોઝારી કરી લીધી.
हमने जो सोची न थी, वह अनहोनी कर ली।अजनबी नज़रों ने चोट गोज़ारी कर दी।
हमने ऐसी अनपेक्षित चीज़ कर ली जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। एक अनजान आँख ने एक गंभीर, दर्दनाक चोट पहुँचाई।
2
કોઈનાથી અમે બે વાત શું પ્યારી કીધી! જવાનીમાં મરણની પૂર્વતૈયારી કરી લીધી.
किसी से हमने दो मीठी बातें क्या की!जवानी में मरण की पूर्व तैयारी कर ली।
हमने किसी से दो प्यारी बातें क्या कीं, कि अपनी जवानी में ही हमने मौत की तैयारी कर ली।
3
અમે મગરૂર મનને મારી લાચારી કરી લીધી, કરી લીધી જીવન, તારી તરફદારી કરી લીધી!
अहंकारी मन को मैंने अपनी लाचारी बना ली,कर ली मैंने जीवन, तेरी तरफ़दारी कर ली!
मैंने अपने घमंडी मन को लाचार बना दिया है, और इस तरह मैंने जीवन का पूर्ण समर्थन किया है।
4
ઘડીઓ આ જુદાઈની અને તે પણ જવાનીમાં! અમે આ પણ સહન તલવાર બેધારી કરી લીધી.
ये जुदाई की घड़ियाँ, वो भी जवानी में! हमने यह भी सहन किया, दोधारी तलवार बनाकर।
जुदाई के इन पलों को, ख़ासकर जवानी में, हमने एक दोधारी तलवार की तरह सहन किया है।
5
મને કંઈ વાત તો કરવી હતી અલગારી મન મારા, વળી કોના થકી તેં પ્રીત પરબારી કરી લીધી!
मुझे कुछ बात तो करनी थी, ऐ मेरे आवारा मन,फिर किसके ज़रिये तूने यह परायी प्रीत कर ली!
हे मेरे आवारा मन, मुझे तुमसे कुछ कहना था, लेकिन तुमने किसके माध्यम से किसी और से प्रेम कर लिया?
6
ભલે એ ના થયાં મારાં, ભલા આ સ્નેહ શું કમ છે? ઘડીભર સાથ બેસી વાત બે પ્યારી કરી લીધી.
भले वो ना हुए मेरे, भला यह स्नेह क्या कम है?घड़ीभर साथ बैठ कर बात दो प्यारी कर ली थी।
भले ही वे मेरे नहीं हुए, क्या यह प्रेम कम है? हमने एक पल के लिए साथ बैठकर कुछ प्यारी बातें कर लीं।
7
કસુંબલ આંખડીના આ કસબની વાત શી કરવી! કલેજું કોતરી નાજુક મીનાકારી કરી લીધી.
कसूंबल आँखड़ियों के इस हुनर की क्या बात करें! कलेजा कोतरकर नाज़ुक मीनाकारी कर ली।
इन नशीली आँखों की कारीगरी की क्या बात करें! इन्होंने मेरा कलेजा तराश कर उस पर नाज़ुक मीनाकारी कर दी।
8
મજાની ચાંદનીમાં નોતરી બેઠા ઉદાસીને, અમે હાથે કરીને રાત અંધારી કરી લીધી.
मज़ेदार चाँदनी में उदासी को न्योता दे बैठे,हमने अपने हाथों से ही रात अँधेरी कर ली।
हमने मज़ेदार चाँदनी में उदासी को आमंत्रित कर लिया, और इस तरह अपने ही हाथों से रात को अँधेरा कर लिया।
9
હવે મિત્રો ભલે ગુસ્સો ગઝલ પર ઠાલવે ‘ઘાયલ’, અમારે વાત બે કરવી હતી પ્યારી, કરી લીધી.
अब दोस्त भले ग़ज़ल पर गुस्सा उतारें 'घायल',हमें बात दो करनी थी प्यारी, कर ली हमने।
अब मित्र भले ही ग़ज़ल पर अपना गुस्सा निकालें, 'घायल', हमें दो प्यारी बातें कहनी थीं, सो हमने कह दीं।
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