चाहूँ तब घूँट भरूँ और चाहूँ तब त्याग करूँ! मेरा तो ऐसा है, मेरे मनचाहे भाग करूँ!

“When I desire, I take a draught, and when I desire, I forsake;Such is my way, I make my portions as I like.”

— अमृत घायल
अर्थ

यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपनी इच्छानुसार किसी भी चीज को ग्रहण या त्याग करता है, और अपने जीवन या संसाधनों के हिस्से अपनी पसंद के अनुसार बनाता है।

विस्तार

यह शेर इंसान के दिल की उस उलझन को बयान करता है, जहाँ मन एक तरफ़ जीना चाहता है और दूसरी तरफ़ सब कुछ छोड़ना चाहता है। शायर कहते हैं कि उनका मन न तो किसी चीज़ में स्थिर रहता है, न ही पूरी तरह से त्याग कर पाता है। यह एक बेचैनी है, एक ऐसा खिंचाव जो हमें हमेशा अपनी मर्ज़ी के हिसाब से भटकाता रहता है। यह सिर्फ़ एक भावना नहीं, बल्कि एक ज़िंदगी का सच है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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