इसलिए तो दूर से उसको करता हूँ मैं सलाम,
मौलवी भी है 'महामाया' मुझे मालूम है।
“Hence, I salute him from a distance, For I know even the cleric is 'Mahamaya'.”
— अमृत घायल
अर्थ
मैं उसे दूर से ही सलाम करता हूँ क्योंकि मुझे यह ज्ञात है कि मौलवी भी 'महामाया' का ही रूप है।
विस्तार
यह शेर न केवल एक विचार है, बल्कि एक गहरा दर्शन है। अमरुत घायल जी कहते हैं कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी धार्मिक या ज्ञानी क्यों न लगे, वह 'महामाया' से परे नहीं है। शायर यहाँ हमें यह याद दिला रहे हैं कि हमें किसी भी चीज़ को आँख बंद करके स्वीकार नहीं करना चाहिए। हर बड़ी बात के पीछे एक भ्रम होता है, और उस भ्रम को पहचानना ही समझदारी है।
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