“Two-legged are merely shadows, I know well,They never rushed to aid, I know well.”
मुझे मालूम है कि सिर्फ परछाइयाँ ही दो पैरों वाली होती हैं और मुझे यह भी मालूम है कि वे कभी सहायता के लिए नहीं दौड़ीं।
ये शेर सिर्फ़ पैरों की बात नहीं करता, ये इंसान की रूह की बात करता है। शायर कहते हैं कि हमारी ताक़त, हमारा वजूद, बस परछाईं है। मतलब ये नहीं कि हम कमज़ोर हैं, बल्कि ये कि हमें अपनी सीमाओं का एहसास है। हमें पता है कि चाहे हम कितनी भी कोशिश करें, कोई बाहरी सहारा हमें हमेशा नहीं मिल सकता। ये शेर आत्म-स्वीकृति का एक बहुत ही गहरा एहसास है।
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