नित समय जैसे उगती ही रही, अस्त में भी न अस्त हुई वो ग़ज़ल।
“Like the dawn, it kept on rising, And even in its setting, that ghazal never set.”
— अमृत घायल
अर्थ
वह ग़ज़ल निरंतर सूर्योदय की तरह उगती रही और अस्त होने पर भी कभी नहीं डूबी।
विस्तार
ये शेर उस कला की अमरता को बयां करता है जो समय की सीमाओं से परे होती है। शायर कहते हैं कि कोई ग़ज़ल है, जो हर पल के साथ उगती रहती है, और सूर्यास्त के गहरे अँधेरे में भी नहीं डूबती। इसका मतलब है कि जो चीज़ दिल को छू जाती है, जो कला है, वह कभी पुरानी नहीं होती.... वह हमेशा ज़िंदा रहती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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