बुद्धि संकट से डर जाए तो बुद्धि कहलाए नहीं,प्रेमपंथ से तर जाए तो प्रेम कहलाए नहीं।

“If intellect shrinks from crisis, it's not true intellect,If love abandons its path, it's not true love.”

— अमृत घायल
अर्थ

जो बुद्धि संकट से डर जाए, वह सच्ची बुद्धि नहीं है; और जो प्रेम अपने मार्ग से हट जाए, वह सच्चा प्रेम नहीं है।

विस्तार

यह शेर बताता है कि कोई भी चीज़ जब तक मुश्किलों का सामना न करे, तब तक उसका असली वजूद पता नहीं चलता। शायर कह रहे हैं कि बुद्धि का सच्चा होना तब साबित होता है जब वह संकट से डरे नहीं। और प्रेम... वह तो सिर्फ़ राह पर चलकर ही निखरता है। यह जीवन का सबसे गहरा सच है, जिसे शायर ने बहुत ही ख़ूबसूरती से बयां किया है।

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