उठाओ कोई जनाज़ा जवान प्यास का! कि मीत माँडी नहीं जाती भग्न जाम की तरफ़।
“Raise a bier for this young thirst's demise! For the gaze cannot fix upon the shattered cup.”
— अमृत घायल
अर्थ
इस युवा प्यास का जनाज़ा उठाओ, क्योंकि अब टूटे हुए प्याले की ओर देखा भी नहीं जा सकता।
विस्तार
यह शेर उस गहरे मायूसी और टूटे वादों की बात करता है। यहाँ 'जवान प्यास' उस आशिक़ के दिल की तड़प है, जो कभी बुझती नहीं। शायर कहते हैं कि मेरी प्यास का जनाज़ा उठा लो, क्योंकि मेरी महबूबा नज़र नहीं डालती टूटे हुए जाम पर। यह न सिर्फ़ एक विरह की कहानी है, बल्कि उस ज़माने की है जब वादे टूटने के बाद, मोहब्बत का कोई सहारा नहीं बचा।
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