करी जो बंदगी साहिब की अदब से की,मुड़े न हाथ हमारे कभी सलाम की तरफ।
“If with reverence, we served the Lord,Our hands ne'er turned to offer salutations abroad.”
— अमृत घायल
अर्थ
अगर हमने मालिक (ईश्वर) की बंदगी अदब से की, तो हमारे हाथ कभी दूसरों को सलाम करने की ओर नहीं मुड़े।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है.... शायर बता रहे हैं कि अगर आप किसी भी इष्टदेव या अपने गुरु की सेवा में पूरी ईमानदारी और श्रद्धा से लगे रहें, तो कभी भी आपको उपेक्षित नहीं किया जाएगा। यह विश्वास का एक खूबसूरत सबक है.... कि सच्चे समर्पण का फल हमेशा मिलता है।
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