वह वचन निभाता है कई बार इकरार के बिना,वह मिल जाता है राह में मुलाक़ात के बिना।
“Often keeps his word without a formal vow,He is met upon the path, without a meeting somehow.”
— अमृत घायल
अर्थ
वह अक्सर बिना किसी वादे के अपना वचन निभाता है। वह बिना किसी मुलाकात के रास्ते में मिल जाता है।
विस्तार
ये शेर उस रिश्ते की खूबसूरती को बयां करता है, जिसमें वादे ज़ुबान पर नहीं होते, बल्कि दिल में बसते हैं। शायर कह रहे हैं कि सच्चा निभाना.... इकरार की ज़रूरत नहीं होती। और मिलना भी.... एक मुक़र्रर मुलाक़ात का मोहताज नहीं होता। यह वो एहसास है जो अचानक आ जाता है, बिना किसी आहट के!
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