दुःख के बिन, दर्द के बिन, दुःख की कोई बात भी बिन,मन विचलित हो जाता है कभी-कभी विलाप के बिन।

“Without sorrow, without pain, without a word of woe,The mind is churned sometimes, without lament's outward show.”

— अमृत घायल
अर्थ

दुःख, दर्द या दुख की किसी बात के बिना भी, मन कभी-कभी बिना किसी विलाप के ही अंदर से विचलित हो जाता है।

विस्तार

यह शेर बताता है कि दिल का हाल कितना उलझा हुआ होता है। शायर कहते हैं कि कभी-कभी दुख की कोई बड़ी वजह नहीं होती, फिर भी मन बेचैन हो जाता है। यह बेचैनी किसी बाहरी दर्द की मोहताज नहीं होती; यह तो बस अंदर ही अंदर एक विलाप होती है, जो हमें हमेशा याद दिलाती है कि दिल हमेशा कुछ न कुछ खोज रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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