हँसना अचूक हँसना, दुःख में भी मुक्त हँसना,दीवानगी का यह डहापन मुझे भाता है।
“Laugh unfailingly, laugh certainly,Even in sorrow, laugh uninhibitedly.This wisdom of madness,I truly adore.”
— अमृत घायल
अर्थ
व्यक्ति को निश्चित रूप से और खुलकर हँसना चाहिए, यहाँ तक कि दुख में भी बेपरवाह होकर हँसना चाहिए। मुझे पागलपन की यह बुद्धिमत्ता बहुत भाती है।
विस्तार
ये शेर जीवन के एक बहुत गहरे सच को बयां करता है। शायर कहते हैं कि हँसना सिर्फ खुशी के मौके पर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक आदत बन जानी चाहिए। दुःख में भी हँसना, यानी दिल को पूरी आज़ादी देना। यह जो दीवानगी है न, यह अपनी बेपरवाही, अपनी ज़िंदादिली है, जो हमें हर दर्द से बचाती है। यह एक तरह का जीवन जीने का फ़लसफ़ा है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
