“I have embraced death many times in life,Just like this body, I also like the shroud.”
कवि कहता है कि उसने अपने जीवन में कई बार मौत को गले लगाया है। इस शरीर की तरह ही उसे कफ़न भी पसंद है।
यह शेर ज़िंदगी और मौत के रिश्ते को बहुत ही गहरे अंदाज़ में बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि मौत अब उनके लिए कोई अनजाना डर नहीं रही, बल्कि एक जानी-पहचानी साथी बन गई है। यह एक तरह का सुकून है.... एक अजीब सा समर्पण! जिस तरह शरीर एक अवस्था है, उसी तरह कफ़न भी उन्हें उतना ही अपना लगता है। यह ज़िंदगी की नश्वरता को स्वीकार करने का नज़रिया है।
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