ऐ ‘घायल’, मुझे मुबारक ये मेरे ऊर्मिकाव्य, मैंने रो-रोकर भरे हैं वो रण, मुझे वो भाते हैं।

“O 'Ghayal', blessed are these lyrical poems of mine to me, I have filled those deserts with tears, and those deserts I now love.”

— अमृत घायल
अर्थ

ऐ 'घायल', मुझे मेरे ये ऊर्मिकाव्य मुबारक हों। मैंने रो-रोकर जिन दश्तों को भरा है, वे मुझे प्रिय हैं।

विस्तार

यह शेर सिर्फ शायरी नहीं है, यह एक इज़हार-ए-हुक़ूक है। शायर कहते हैं कि ये नग़मे आप चाहें जो चाहें, लेकिन जो दर्द... जो आँसू... जिनसे ये कला बनी है, वो सिर्फ मेरे हैं। उन्होंने अपनी पीड़ा को ही अपनी सबसे बड़ी दौलत मान लिया है। यह कविता, दर्द के मालिक होने का दावा करती है।

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