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जब भी देखोघायलयूँ ही गर्जना करता है,दिन की क्या? रात में भी पल भर सागर समाता नहीं!

Whenever you look, 'Ghayal' is surging just like this,What of the day? Even for a moment at night, the ocean cannot be silenced!

अमृत घायल
अर्थ

कवि 'घायल' हर पल बेचैन और उथल-पुथल में रहता है, ठीक वैसे ही जैसे समुद्र दिन की तो क्या रात में भी एक पल के लिए भी शांत नहीं होता।

विस्तार

यह शेर एक निरंतर बहती ऊर्जा को दर्शाता है। अमृत्त घायल ने खुद की तुलना समंदर से की है, जिसका मतलब है कि उनका जज़्बा हमेशा उमंग भरा रहता है, चाहे दिन हो या रात। यह एक ऐसे रूह की बात है जो कभी शांत नहीं होती, जो हमेशा अपनी गहराई को ज़िंदा रखती है!

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