ठहरकर ठिकाना पाने को, वही है मानो ठिकाना,कि जिसकी-तिसकी आँखों में जा, झाँकता है दरिया!
“To settle down and find its home, that seems to be its destined place,For in the eyes of everyone, the ocean shows its face!”
— अमृत घायल
अर्थ
ठहरकर ठिकाना पाने के लिए, वही मानो ठिकाना है, जहाँ दरिया हर किसी की आँखों में जाकर झाँकता है।
विस्तार
यह शेर बताता है कि सच्चा ठिकाना, कोई इमारत या जगह नहीं होती। शायर कहते हैं कि दिल को जो सुकून मिलता है, वो सिर्फ किसी की आँखों में झाँकने से मिलता है। आँखें यहाँ सिर्फ देखने का जरिया नहीं हैं, बल्कि एक गहरा समंदर हैं, जिसमें हमारी पूरी कायनात बस जाती है। यह इश्क़ का वो एहसास है जहाँ मंज़िल से ज़्यादा ज़रूरी, वो नज़ारा होता है जो महबूब की आँखों में मिलता है।
