कितनी देर से यूँ ही मुग्ध बना मैं इस मीना बाज़ार में खड़ा हूँ,लगी हैं कतारें नज़रों की, नज़रों की, कतार में खड़ा हूँ।

“For how long have I stood, thus enchanted,In this Meena Bazaar;Rows of gazes have formed, of gazes,I stand in their queue.”

— अमृत घायल
अर्थ

कवि कहता है कि वह कब से इस मीना बाज़ार में मंत्रमुग्ध खड़ा है। उस पर नज़रों की कतारें लगी हुई हैं, और वह उन्हीं नज़रों की कतार में खड़ा है।

विस्तार

यह शेर उस एहसास को बयां करता है जब कोई व्यक्ति किसी की मौजूदगी से पूरी तरह मुग्ध हो जाए। शायर, अम्रुत घायल, इस बार प्यार की निगाहों को एक लंबी कतार से तुलना करते हैं। यह महज़ एक नज़र नहीं है; यह एक लगातार, बहती हुई निगाहों की धारा है, जिसमें वक्ता खोया हुआ महसूस करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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