कोई महरम नहीं मिलता जहाँ में मुझे कहना है कुछ अपनी ज़बाँ में

“No confidant is found in all this world; / I have something to say in a tongue of my own.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

इस संसार में मुझे कोई अपना या राज़दार नहीं मिलता, जबकि मुझे अपनी ही भाषा में कुछ कहना है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ दिल के उस गहरे अकेलेपन को बयां कर रहे हैं, जहाँ इंसान अपनी सच्ची बात किसी से कह नहीं पाता। 'महरम' का मतलब है कोई ऐसा राज़दार जो आपकी खामोशी और रूहानी दर्द को बिना किसी शर्त समझ सके। जब वो कहते हैं कि उन्हें 'अपनी ज़बाँ' में कुछ कहना है, तो उनका इशारा अपनी उस अनूठी दास्तान की तरफ़ है जिसे सुनने और समझने का सलीक़ा इस ज़माने के पास नहीं है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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