इक दर्द हो बस आठ पहर दिल में कि जिस को तख़फ़ीफ़ दवा से हो न तस्कीन दुआ से

“Let there dwell an ache within my heart through every hour and day, which no medicine can ever lessen, nor any prayer soothe away.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

दिल में हर पहर बस एक ऐसा दर्द बना रहे, जिसे न तो दवा से कोई कमी मिले और न ही दुआ से कोई सुकून हासिल हो।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ दर्द से निजात पाने की नहीं, बल्कि मोहब्बत के ऐसे मीठे दर्द की तमन्ना कर रहा है जो आठों पहर दिल में बसा रहे। उर्दू शायरी में इश्क़ का रंज कोई बीमारी नहीं, बल्कि रूह का असल सुकून माना जाता है जिसे इंसान कभी खोना नहीं चाहता। इसलिए शायर चाहता है कि इस दर्द को न तो किसी दवा से राहत मिले और न ही किसी दुआ से यह ठीक हो, क्योंकि यह दर्द ही उसके जीने का सबब है।

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