हक़ीक़त महरम-ए-असरार से पूछ मज़ा अंगूर का मय-ख़्वार से पूछ

“Ask the truth from the confidant of mysteries; ask the grape's true delight from the wine-drinker.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

किसी रहस्य की सच्चाई उस व्यक्ति से पूछो जो भेदों को जानता हो, ठीक वैसे ही जैसे अंगूर का असली मज़ा केवल शराब पीने वाला ही बता सकता है।

विस्तार

यह शेर बहुत सादगी से समझाता है कि किसी चीज़ की असलियत वही जान सकता है जिसने उसकी गहराई को महसूस किया हो। एक आम इंसान के लिए अंगूर सिर्फ़ एक मीठा फल है, लेकिन उसका असली लुत्फ़ और नशा सिर्फ़ वही समझता है जिसने उसे शराब के रूप में चखा हो। ठीक वैसे ही, ज़िंदगी और रूहानियत के गहरे राज़ वही बता सकता है जो दुनियावी दिखावे से परे जाकर उस हक़ीक़त का महरम (राज़दार) बन चुका हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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