कोई दिल-सोज़ हो तो कीजे बयाँ सरसरी दिल की वारदात नहीं

“If there were a sympathetic soul, I would recount my plight; the happenings of the heart are neither trivial nor slight.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

यदि कोई सच्चा हमदर्द या समझने वाला मिले तभी अपने दिल का हाल सुनाया जा सकता है, क्योंकि दिल पर बीतने वाले वाकयात कोई मामूली या साधारण बात नहीं होते।

विस्तार

शायर यहाँ दिल के दर्द की पाकीज़गी और गहराई को बड़ी सादगी से समझा रहे हैं। दिल पर जो गुज़रती है, वह कोई मामूली या सरसरी बात नहीं होती जिसे यूँ ही राह चलते हर किसी से कह दिया जाए। अपने जज़्बातों को बयां करने के लिए किसी ऐसे हमदर्द ('दिल-सोज़') की ज़रूरत होती है, जो उस टीस को वाक़ई अपने सीने में महसूस कर सके।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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