પિંડ જોતાં કો મુક્તજ નથી ત્રિવિધ તાપ ભોગવે ધરથી;

“Considering the physical form, no one is truly free,Enduring the threefold miseries born of the earth, they will be.”

— अखा भगत
अर्थ

शरीर को देखते हुए कोई भी मुक्त नहीं है। वे पृथ्वी से उत्पन्न तीन प्रकार के कष्टों को भोगेंगे।

विस्तार

यह दोहा हमें जीवन की एक गहरी सच्चाई बताता है। यह कहता है कि जब हम खुद को केवल अपने शरीर से जोड़कर देखते हैं, तो हम कभी सच्चे अर्थों में मुक्त नहीं हो पाते। जन्म से ही हम इस दुनिया में 'त्रिविध ताप' यानी तीन प्रकार के दुखों का अनुभव करते हैं। इनमें शारीरिक और मानसिक परेशानियाँ, दूसरे प्राणियों से मिलने वाले कष्ट और प्रकृति या अदृश्य शक्तियों से आने वाली चुनौतियाँ शामिल हैं। यह श्लोक हमें धीरे से याद दिलाता है कि जब तक हम खुद को केवल इस 'पिंड' यानी शरीर के रूप में पहचानते हैं, तब तक दुख हमारी यात्रा का एक स्वाभाविक हिस्सा है। यह हमें शरीर से परे अपनी वास्तविक पहचान को समझने की दिशा में एक सूक्ष्म संकेत देता है, जो सच्ची मुक्ति का मार्ग है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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