સકળ ઇંદ્રિપેં છૂટો રમે રાગદ્વેષ કોઇએ નવ દમે;

“He roams free among all senses; Attachment and aversion bind him not.”

— अखा भगत
अर्थ

वह अपनी सभी इंद्रियों में स्वतंत्र रूप से विचरण करता है; कोई भी राग या द्वेष उसे नियंत्रित नहीं करता।

विस्तार

यह दोहा एक मुक्त आत्मा की सुंदर अवस्था का वर्णन करता है। इसका अर्थ है कि ऐसा व्यक्ति अपनी सभी इंद्रियों के साथ स्वतंत्र रूप से व्यवहार करता है, लेकिन उनसे बंधा नहीं होता। वह दुनिया से जुड़ता है, देखता है, सुनता है, स्वाद लेता है, छूता है और सूंघता है, लेकिन यह सब वैराग्य भाव से करता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि उसे न तो किसी चीज के प्रति तीव्र आसक्ति (राग) और न ही किसी से घृणा (द्वेष) दबा सकती है। वह इच्छाओं के आकर्षण या नफरत के धक्के से अप्रभावित रहता है। यह आंतरिक स्वतंत्रता की स्थिति है जहाँ व्यक्ति जीवन के अनुभवों में भाग लेता है, फिर भी गहरी समता और आंतरिक शांति बनाए रखता है, पूरी तरह से भावनात्मक बंधनों से मुक्त।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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