બંધ મોક્ષ ન કરે ઉચ્ચાર આકાશકુ સુમનો નોહે હાર.

“Of bondage, of freedom, he does not speak,Nor sky-borne flowers, a garland make.”

— अखा भगत
अर्थ

वह बंधन या मोक्ष का उच्चारण नहीं करता। आकाश के फूल हार नहीं बनते।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि 'बंधन' और 'मोक्ष' जैसी अवधारणाएँ स्वयं कोई घोषणा नहीं करतीं। ये हमारी अपनी धारणाएँ हैं। जिस तरह विशाल और असीमित आकाश को अपनी भव्यता दर्शाने के लिए फूलों की माला की आवश्यकता नहीं होती, उसी तरह सच्ची मुक्ति इन द्वैतवादी विचारों से परे है। आकाश स्वयं में पूर्ण है, उसे किसी बाहरी सजावट की ज़रूरत नहीं। इसी प्रकार, परम मुक्ति कुछ पाने या किसी चीज़ से छूटने के बारे में नहीं है, बल्कि यह उस अवस्था से भी ऊपर है जहाँ हम बँधे होने या मुक्त होने के विचार रखते हैं। यह एक ऐसी अनुभूति की ओर इशारा करता है जहाँ ये अवधारणाएँ मिट जाती हैं, और हम अपने स्वाभाविक, बिना शर्त वाले अस्तित्व को पहचानते हैं, ठीक आकाश की तरह, जो स्वयं में पूर्ण है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.