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અખા દે ખણહારો દ્વત ટળતે રહે તે સર્વાતીત.

Akha, the one who sees duality,He who transcends it, is beyond all.

अखा भगत
अर्थ

अखा कहते हैं कि जो द्वैत को देखता है और उसे पार कर लेता है, वह सर्वातीत हो जाता है, यानी सभी से परे है।

विस्तार

अखा जी का यह गहरा दोहा समझाता है कि जब हम किसी चीज को देखते या अनुभव करते हैं, तो देखने वाले और देखी जाने वाली वस्तु के बीच एक द्वैत, एक विभाजन पैदा हो जाता है। यह बोध ही अलगाव बनाता है। पर अखा जी कहते हैं कि सच्ची मुक्ति इस द्वैत से ऊपर उठने में है। 'सर्वातीत' होने का अर्थ है कर्ता और कर्म के भेद, और अन्य सभी कथित विभाजनों से परे जाना। यह एक ऐसी एकात्मता की स्थिति तक पहुँचना है जहाँ देखने वाला और देखा जाने वाला एक हो जाते हैं, और मन के सभी विभाजन मिट जाते हैं। यही अवस्था 'सर्वातीत' कहलाती है, जहाँ आप वास्तव में सबसे परे होते हैं।

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