પ્રવાહ ન દીસે દીસે તરંગ તેમ ચિદ ન દીસે દીસે અંગ

“The flow is not seen, the wave appears to sight,So consciousness is not seen, the body shines forth bright.”

— अखा भगत
अर्थ

जैसे पानी का प्रवाह नहीं दिखता, बल्कि उसकी लहर दिखती है; वैसे ही चेतना नहीं दिखती, बल्कि शरीर दिखता है।

विस्तार

समुद्र को देखें। आपको सीधे वह विशाल, अदृश्य धारा दिखाई नहीं देती जो सतह के नीचे बह रही है, है ना? आप क्या देखते हैं, वे हैं ऊपर नाचती हुई लहरें। यह सुंदर दोहा इसी कल्पना का उपयोग करके हमारे बारे में एक गहरा अर्थ समझाता है। जैसे लहरों से धारा छिपी रहती है, वैसे ही हमारा सच्चा स्वरूप, हमारी चेतना या 'चित', कुछ ऐसा नहीं है जिसे हम अपनी आँखों से देख सकें। हम जो देखते हैं वह है शरीर, हमारा 'अंग'। यह शिक्षा देती है कि हमारा शारीरिक रूप केवल एक अभिव्यक्ति है, लहरों की तरह। असली 'हम' वह अदृश्य, अंतर्निहित चेतना है जो सब कुछ चेतन करती है। यह हमें अपनी गहरी प्रकृति को समझने के लिए दृश्यमान से परे देखने के लिए प्रोत्साहित करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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