“For the wise, the feeling is alike, In the Guru's mind, no aversion can strike.”
समझदार व्यक्ति के लिए भाव एक समान होते हैं, और गुरु के मन में कोई द्वेष नहीं होता।
यह दोहा एक सच्चे समझदार व्यक्ति या गुरु के सार को खूबसूरती से दर्शाता है। यह बताता है कि एक ज्ञानी व्यक्ति सभी के प्रति समान और संतुलित दृष्टिकोण रखता है, बिना किसी भेदभाव के। उनके मन में किसी के लिए कोई दुर्भावना या नकारात्मक भावना नहीं होती। एक सच्चे गुरु का हृदय सभी पूर्वाग्रहों और पक्षपातों से मुक्त होता है, वे हर आत्मा को समान स्नेह, सम्मान और बिना शर्त प्यार से देखते हैं। यह ज्ञान सार्वभौमिक स्वीकृति, समभाव और नकारात्मकता की अनुपस्थिति पर जोर देता है, यह उजागर करते हुए कि सच्ची समझ सभी को समान देखने में निहित है।
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