અખા આંધળે લુંટ્ યો બજાર સંતગુરુનો એવો વિચાર.

“Akha, the blind one looted the market; such is the Saint-Guru's insight.”

— अखा भगत
अर्थ

अखा, अंधे ने बाजार लूटा; संत-गुरु का ऐसा विचार है।

विस्तार

अखा का यह दोहा एक गहरा रूपक इस्तेमाल करता है: "एक अंधे व्यक्ति ने बाज़ार लूटा।" इसका अर्थ शारीरिक अंधापन या चोरी नहीं है। अखा बताते हैं कि हम में से कई लोग सच्ची आध्यात्मिक समझ के बिना जीते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कोई अंधा व्यक्ति हलचल भरे बाज़ार में रास्ता ढूँढ रहा हो। हम दुनिया के कामों में व्यस्त रहते हैं, इच्छाएँ और चीज़ें जमा करते हैं, लेकिन अक्सर जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ नहीं पाते। हम सतही लाभों पर ध्यान केंद्रित करके अपने ही अस्तित्व को "लूट" रहे होते हैं, यह जाने बिना कि वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है। संत-गुरु, अपनी गहन बुद्धि से, इस अवस्था को देखते हैं। वे समझते हैं कि यह अंधी और दिशाहीन गतिविधि, भले ही वह कुछ हासिल करती दिखे, अक्सर जीवन के वास्तविक सार से चूक जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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