आप के सर की क़सम मेरे सिवा कोई नहीं बे-तकल्लुफ़ आइए कमरे में तन्हाई तो है

“I swear upon your life, there is no one here save me; come in without hesitation, there is solitude in this room at least.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मुझे आपके सिर की कसम है कि मेरे अलावा यहाँ कोई नहीं है। आप बिना किसी संकोच के अंदर आ जाइए, कम से कम कमरे में एकांत तो है।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने महबूब के संकोच और झिझक को बड़े प्यार से मिटाने की कोशिश कर रहा है। महबूब के सर की क़सम खाकर वह यह मीठा भरोसा दिलाता है कि कमरे में ज़माने की कोई पराई नज़र नहीं है, बस वही अकेला मौजूद है। यहाँ 'तन्हाई' कोई उदासी नहीं, बल्कि एक ख़ूबसूरत पनाहगाह बन गई है जहाँ दोनों बिना किसी हिचक या दुनियावी तकल्लुफ़ के एक-दूसरे के करीब आ सकते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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