“From your graceful stature, O lovely one, Nature's Artisan has shown / The turmoil of Doomsday itself, cast into a living mold.”
ऐ सुंदर महबूब, कुदरत के बनाने वाले (ईश्वर) ने तुम्हारे कद-काठी के जरिए क़यामत के हंगामे को एक साँचे में ढालकर दुनिया को दिखा दिया है।
इस शेर में शायर महबूब के हुस्न और उसके क़द-ओ-क़ामत की तारीफ़ में एक अनोखा तख़य्युल पेश कर रहा है। उर्दू शायरी में महबूब के उठने-चलने को अक्सर क़यामत बरपा करने वाला माना जाता है। शायर कहता है कि कुदरत के अज़ीम कारीगर यानी ख़ुदा ने हश्र की तमाम हलचल और आफ़त को तुम्हारे जिस्म के साँचे में ढालकर दुनिया के सामने रख दिया है, यानी तुम्हारा दीदार ही इंसान के होश उड़ाने के लिए काफ़ी है।
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