मिले अगर लब-ए-शीरीं का तेरे इक बोसा तो लुत्फ़ हो मुझे अलबत्ता यार ईद के दिन

“Were I to receive but one kiss from your sweet lips, then truly, my beloved, Eid would be pure delight.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अगर मुझे तुम्हारे मीठे होंठों का एक बोसा (चुंबन) मिल जाए, तो ऐ दोस्त, ईद के दिन मुझे सचमुच बहुत मज़ा आ जाएगा।

विस्तार

ईद का त्योहार खुशियों और शीर-खुरमे की मिठास का पैगाम लाता है, लेकिन एक आशिक़ के लिए महबूब के प्यार के बिना हर जश्न अधूरा रहता है। यहाँ शायर अपने सनम के 'लब-ए-शीरीं' यानी मीठे होंठों के एक बोसे (चुंबन) को अपनी सबसे बड़ी ईदी मानता है। इस सादे और शोख़ शेर में यह ख़ूबसूरत जज़्बा छुपा है कि जब तक चाहने वाले का प्यार न मिले, तब तक ईद का असली मज़ा मुकम्मल नहीं हो सकता।

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