“Here rings the nightingale's song, there blooms the smiling rose; the fiery youth of spring is manifest upon the day of Eid.”
ईद के दिन कहीं बुलबुल का तराना सुनाई दे रहा है तो कहीं फूल खिलखिला रहे हैं; ऐसा लगता है मानो बहार की जवानी का पूरा जोश हर तरफ़ साफ़ नज़र आ रहा हो।
यह शे’र ईद की ख़ुशी और बहार के मौसम के हसीन संगम को बड़े प्यारे अंदाज़ में पेश करता है। शायर चमन की तस्वीर खींचते हुए कहता है कि कहीं बुलबुल के मधुर गीत गूँज रहे हैं और कहीं खिलते हुए फूल मुस्कुरा रहे हैं, जैसे पूरी क़ुदरत ही जश्न मना रही हो। यह शेर हमें महसूस कराता है कि त्योहार का दिन ज़िंदगी में एक नई ताज़गी और जवानी का जोश भर देता है, जहाँ दिल की ख़ुशी और माहौल की रंगीनी एक हो जाते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
