या रब मुझे महफ़ूज़ रख उस बुत के सितम से मैं उस की इनायत का तलबगार नहीं हूँ

“O Lord, keep me safe from the cruelty of that idol; I am no seeker of her favor and grace.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

हे ईश्वर, मुझे उस महबूब के ज़ुल्म व सितम से सुरक्षित रख; मुझे उसकी किसी कृपा या मेहरबानी की भी कोई चाह नहीं है।

विस्तार

इस शे’र में शाइर अपने बेपरवाह और संगदिल महबूब को 'बुत' यानी पत्थर की मूरत कह रहा है, जो ख़ूबसूरत तो है मगर पूरी तरह बेदर्द। इश्क़ में आशिक़ अक्सर महबूब की इनायत और मेहरबानी की दुआ मांगता है, लेकिन यहाँ वह ज़ुल्म सहते-सहते इस कदर थक चुका है कि अब उसे कोई करम नहीं चाहिए। वह तो बस ख़ुदा से उस सितमगर से महफ़ूज़ रहने की पनाह मांग रहा है, जो टूटे हुए दिल की गहरी लाचारी और बेज़ारी को दर्शाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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