शौक़-ए-पा-बोसी-ए-जानाँ मुझे बाक़ी है हनूज़ घास जो उगती है तुर्बत पे हिना होती है

“The longing to kiss my beloved's feet still lingers in me; the grass that sprouts upon my grave turns to henna for them.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मुझे अब भी अपने महबूब के क़दम चूमने की चाहत बाक़ी है, इसीलिए मेरी क़ब्र पर उगने वाली घास उनके लिए मेंहदी बन जाती है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस इन्तहा को बयान करता है जहाँ मौत के बाद भी महबूब के लिए चाहत कम नहीं होती। आशिक़ कहता है कि मेरे मरने के बाद भी महबूब के क़दम चूमने की आरज़ू ख़त्म नहीं हुई, इसी वजह से मेरी क़ब्र पर उगने वाली घास महबूब के पैरों में रचने वाली हिना (मेंहदी) बन जाती है। यहाँ क़ब्र की घास को हिना का रंग देना एक बेहद ख़ूबसूरत और भावुक कल्पना है, जो दिखाती है कि आशिक़ का वजूद ख़ाक होकर भी महबूब की ख़िदमत और शृंगार में लगा रहना चाहता है।

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