क्यूँ न देखूँ चमन को हसरत से
आशियाँ था मिरा भी याँ पर-साल
“Why shouldn't I gaze upon the garden with longing, My nest was also here, for years.”
— میر تقی میر
معنی
میں اس باغ کو حسرت سے کیوں نہ دیکھوں، میرا آشیانہ بھی یہاں پر سال تھا۔
تشریح
यह शेर वक़्त के गुज़रने और यादों के एहसास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि इस जगह से अपना जुड़ाव इतना गहरा है कि इसे देखकर हसरत महसूस करना लाज़मी है। यह एक टूटे हुए रिश्ते या गुज़रे हुए दौर की तन्हा याद है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
