क़ासिद जो वाँ से आया तो शर्मिंदा मैं हुआ
बेचारा गिर्या-नाक गरेबाँ दरीदा था
“When Qasid came from that direction, I felt ashamed; Poor Girya-nak, the beggar, was desolate.”
— میر تقی میر
معنی
قاصد جو وں سے آیا تو شرمندہ میں ہوا؛ بیچارہ گِریّا-ناک، دریدہ تھا۔
تشریح
यह शेर किसी की मौजूदगी से होने वाली नज़ाकत और हिजाब के टूटने का एहसास कराता है। शायर को क़ासिद के आने पर शर्म आती है, क्योंकि उनकी सारी उदासी और गम की हालत किसी के सामने खुल गई है।
