बहके जो हम मस्त आ गए सौ बार मस्जिद से उठा
वा'इज़ को मारे ख़ौफ़ के कल लग गया जुल्लाब सा
“How many times did we, intoxicated, wander away, that when we rose from the mosque, the preacher was struck with fear, and fell like a beam of gold?”
— میر تقی میر
معنی
کتنی بار ہم بہہ کر مست آ گئے، کہ جب ہم مسجد سے اٹھے تو واعظ کو خوف کے مارے ایسا لگا جیسے سونے کی لڑی۔
تشریح
यह शेर रूहानी तंज़ का एक बेहतरीन नमूना है। शायर कहते हैं कि अगर मैं अपनी बेपरवाह मस्ती में सौ बार मस्जिद में आ जाऊँ.... तो वज़ीर को डर के मारे ज़ोर का झटका लग जाएगा! यह बात सच्ची आस्था और पाखंड के बीच के फ़र्क़ को बयान करती है।
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