गुल शर्म से बह जाएगा गुलशन में हो कर आब सा
बुर्के से गर निकला कहीं चेहरा तिरा महताब सा
“Like a rose that would scatter in the garden with the rain, Your face, like the full moon, if it ever emerges from your veil.”
— میر تقی میر
معنی
گُل شرم سے بہ جائے گا گلشن میں ہو کر آب سا، برکے سے گر نکلا کہیں چہرہ تیرا مہتاب سا۔
تشریح
यह शेर एक ऐसी हसीन और बेपनाह खूबसूरती का ज़िक्र करता है जो इतनी तीव्र है कि उसे रोका नहीं जा सकता। शायर कहते हैं कि महक फैलने से पूरा गुलशन शर्म से बह जाएगा... और चेहरे का नूर तो चाँद की तरह होगा, जो हर जगह रौशनी फैला देगा।
1 / 9Next →
