अब के भी सैर-ए-बाग़ की जी में हवस रही
अपनी जगह बहार में कुंज-ए-क़फ़स रही
“Even now, there is a craving in the spirit for a stroll through the garden, While in its own place, the grove of the cage remains.”
— میر تقی میر
معنی
اب کے بھی سیرِ باغ کی جی میں حوس رہی۔ اپنی جگہ بہار میں کنجِ قفس رہی۔
تشریح
यह शेर आज़ादी की चाहत और क़ैद की हकीकत के बीच का फ़र्क़ बयान करता है। दिल में बाग़ों में सैर करने की हवस है, मगर क़दमों की जगह एक संकरा, क़फ़स जैसा कोना है।
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