आवारा 'मीर' शायद वाँ ख़ाक हो गया है
यक गर्द उठ चले है गाह उस की रहगुज़र से
“Perhaps the wanderer, 'Mir', has turned to dust, When a cloud of dust rises from his path.”
— میر تقی میر
معنی
آوارہ کہتا ہے کہ شاعر ’میر‘ شاید وہاں خاک ہو گیا ہے، جب وہاں سے گزرتے ہوئے تھوڑا سا دھول کا گبار اٹھتا ہے۔
تشریح
यह शेर वजूद की नश्वरता का बेहतरीन तसव्वुर है। शायर कहते हैं कि मिर्ज़ा तक़ी मीर भी आख़िर में बस एक धूल का कण हैं... जो वक़्त की रफ़्तार के आगे सब कुछ मिटा देता है।
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