कमर उस की रश्क रग-ए-जाँ है 'मीर'
ग़रज़ इस से बारीक-तर कुछ नहीं
“Her waist is the envy of my very life, O Meer, Nothing could be finer or more subtle than this.”
— میر تقی میر
معنی
اس کی کمر میری جان کی رشک ہے، میر۔ مجھ سے باریک تر کچھ نہیں ہو سکتا۔
تشریح
यह शेर महबूब के एक अंग को भी इबादत का दर्जा दे देता है। शायर कहते हैं कि उसकी कमर की चाहत मेरी रूह की रश्क है, और इस चाहत से ज़्यादा नाज़ुक कोई ग़रज़ नहीं हो सकती।
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