सरकशी ही है जो दिखलाती है इस मज्लिस में दाग़
हो सके तो शम्अ साँ दीजे रग-ए-गर्दन जला
“The mere showing of a flaw is the 'sarakashi' in this gathering, If possible, let the candle burn the vein of the neck.”
— میر تقی میر
معنی
سَرَکشی ہی ہے جو دکھلاتی ہے اس محفل میں داغ۔ ہو سکے تو شمع سے دے جے رگِ گِرندن جلا۔
تشریح
ये शेर इश्क़ की उस हद को बयां करता है जहाँ इज़्ज़त और जुनून का भेद मिट जाता है। शायर कहते हैं कि महफ़िल में जो दाग़ नज़र आ रहा है, वो कोई कलंक नहीं, बल्कि हमारी सरकशी है। और अगर इस आग में जलना ही नसीब है, तो क्यों न ख़ुद ही शमा दीजे और जला दिया जाए!
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