वो नहीं अब 'मीर' जो छाती जले
खा गया सारे जिगर को हाए दाग़
“It is not now, 'Mir', that the chest burns, Having consumed all the heart, oh stain.”
— میر تقی میر
معنی
وہ نہیں اب 'میر' جو چھاتی جلے، کھا گیا سارے جگر کو ہائے داغ۔
تشریح
ये शेर दर्द की तह तक बात करता है। शायर कहते हैं कि अब जो जलन छाती में होती थी, वह अब नहीं है... क्योंकि दाग ने तो पूरे जिगर को खाया है। यह ज़ख्म बाहरी नहीं, बल्कि रूहानी है।
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