शायद शराब-ख़ाने में शब को रहे थे 'मीर'
खेले था एक मुग़बचा मोहर-ए-नमाज़ से
“Perhaps in the tavern, at night, 'Mir' was present, Playing a game with a coin taken from the prayer mat.”
— میر تقی میر
معنی
شاید شراب خانے میں شب کو 'میر' मौजूद थे، اور وہ نماز کی چادر سے لیے گئے ایک سکے کے ساتھ کوئی کھیل کھیل رہے تھے۔
تشریح
यह शेर पाखंड और आस्था के विरोधाभास को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि शायद शराबी माहौल में भी, वह नमाज़ की मोहर वाले सिक्के से खेल रहे थे। यह उनकी आंतरिक उथल-पुथल और दुनियावी जीवन में भी आध्यात्मिकता की पकड़ को दिखाता है।
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